भारत first स्वादेशी Hydrogen powered Train कैसे काम करती है? भारत की इस ट्रेन की क्या विशेषताएं हैं?
भारत अपनी पहली Hydrogen powered Train के साथ सस्टेनेबल रेलवे नेटवर्क की ओर बढ़ाया कदम।
विश्व के चौथे सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क वाले देशों में शामिल भारत को अपने 2070 के शून्य कार्बन उत्सर्जन( Zero carbon emissions ) लक्ष्य को पूरा करने के लिए रेलवे को ईको फ्रेंडली बनाना एक बड़ी चुनौती पूर्ण काम है। भारत इन्हीं चुनौतियों भविष्य के जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को पूरा करने और बड़े रेलवे नेटवर्क को पर्यावरण इको फ्रेंडली बनाने की इस चुनौती को कम करने की ओर भारत का सबसे बड़ा कदम। जींद में बनी स्वादेशी Hydrogen- powered Train प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 जुलाई को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
आइए जानते हैं! न्यू जेनरेशन की न्यू टेक्नोलॉजी Hydrogen powered Train कैसे काम करती है? भारत की इस ट्रेन की क्या इसकी विशेषताएं हैं? अभी कितने देशों के पास इसी प्रकार की टेक्नोलॉजी हैं?

Hydrogen- powered -train क्या है?
सरल शब्दों में हाइड्रोजन चलित रेल एक ऐसी ट्रेन होती है, जो पारंपरिक डीज़ल की जगह हाइड्रोजन गैस द्वारा चालित किया जाता है। इसमें हाइड्रोजन को जलाने की बजाए फ्यूल सेल्स के द्वारा बिजली बनाकर ट्रेन में लगी इलेक्ट्रिक मोटर चलाई जाती है।
इसको कुछ तरीक़े से समझिए –
पहले चरण में ट्रेन के की छत पर हाई प्रेशर वाले टैंकों में हाइड्रोजन को भंडारण किया जाता है।
दूसरे चरण में हाइड्रोजन को फ्यूल सेल्स में भेजकर बाहर से ऑक्सीजन लेकर रिएक्शन कराया जाता है।
तीसरे चरण में बिजली ट्रेन में लगे इलेक्ट्रॉनिक मोटर को चलाती है। तेज़ी को बढ़ाने या ऊंचाई पर चढ़ने के लिए बैटरी में अतिरिक्त हाइड्रोजन ऊर्जा को रखा जाता है।
भारत की Hydrogen- powered -train की विशेषताएं हैं?
भारत की Hydrogen- powered -train की बात करें तो ये पूरी तरह स्वादेशी है जो भारत के आत्मनिर्भर लक्ष्य को प्रदर्शित करता है।
यह 10 डिब्बों (कोच) वाली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन होगी।
इसमें 1200 किलोवाट (KW) की हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणाली होगी, जो बिजली बनाकर ट्रेन चलाएगी।
इसकी डिज़ाइन गति 110 किमी/घंटा है, लेकिन इसे अधिकतम 75 किमी/घंटा की रफ्तार से चलाने की मंजूरी मिली है।
इसमें लगभग 2,600 यात्री यात्रा कर सकेंगे।
यह ट्रेन भारत में ही डिज़ाइन और विकसित की गई है।
यह जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ेगी।
रास्ते में कई छोटे स्टेशनों और हॉल्ट पर भी रुकेगी, जिससे स्थानीय यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

भारत की हाइड्रोजन ट्रेन में सुरक्षा के मुख्य उपाय
हाइड्रोजन गैस के रिसाव (Leakage) का पता लगाने के लिए विशेष लीक डिटेक्टर लगाए गए हैं।
आग लगने का तुरंत पता लगाने के लिए फ्लेम डिटेक्टर लगाए गए हैं।
सभी सुरक्षा सेंसरों की नियमित जांच और सफाई की जाएगी, ताकि वे हमेशा सही तरीके से काम करें।
ट्रेन में हर समय वेंटिलेशन (हवा का प्रवाह) बना रहेगा, जिससे गैस जमा न हो।
यदि अधिक गर्मी, आग या धुआँ दिखाई देता है, तो सिस्टम अपने आप हाइड्रोजन की सप्लाई बंद कर देगा।
लोको पायलट के केबिन में विशेष इमरजेंसी मोड दिया गया है, जिससे ट्रेन को सुरक्षित स्थान तक ले जाया जा सके।
लोको पायलट के सामने डिस्प्ले स्क्रीन होगी, जिस पर पूरे हाइड्रोजन सिस्टम की रीयल-टाइम स्थिति दिखाई देगी।
ट्रेन के सुरक्षित संचालन के लिए नियमित निरीक्षण (Inspection) और रखरखाव (Maintenance) किया जाएगा।

मुख्य रूप से हाइड्रोजन ट्रेन वाले देश (2026 तक)
लगभग 6–9 देशों में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें या तो संचालन में हैं या परीक्षण (Trial/Pilot Project) के चरण में हैं।
प्रमुख देश
जर्मनी – दुनिया का पहला देश जिसने हाइड्रोजन से चलने वाली यात्री ट्रेन की व्यावसायिक (Commercial) सेवा शुरू की।
फ्रांस – क्षेत्रीय हाइड्रोजन ट्रेनों का परीक्षण और संचालन।
इटली – हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं पर कार्य और सीमित संचालन।
चीन – स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन विकसित कर परीक्षण एवं सीमित संचालन।
जापान – हाइड्रोजन ट्रेनों का परीक्षण और प्रदर्शन परियोजनाएँ।
भारत – जुलाई 2026 में जींद–सोनीपत रेलखंड पर स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू किया।
ऑस्ट्रिया – सफल परीक्षण किए हैं।
अन्य देश जो हाइड्रोजन ट्रेन विकसित रेस में शामिल हैं—
ब्रिटेन (UK) ने ‘HydroFLEX’ नामक अपनी पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन का सफल परीक्षण किया।
इटली और अमेरिका: इन देशों में भी हाइड्रोजन ट्रेनों के ऑर्डर्स दिए जा चुके हैं और कुछ चुनिंदा रूट्स पर ट्रायल्स चल रहे हैं।

सस्टेनेबल गतिशीलता की तरफ भारत
भारत की ये ग्रीन एनर्जी हाइड्रोजन ट्रेन भविष्य के लिए शुरुआत से कहीं अधिक है। यह ना केवल बदलते भारत को और मजबूत बनाने में मदद करेगा साथ ही साथ आत्मनिर्भरता भारत मिशन को पहले से अधिक गति देगा। विशेषज्ञ कह चुके हैं, आने वाला भविष्य उसी देश का उज्जवल होगा जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को जीवाश्म ईंधन से ग्रीन एनर्जी में लगभग पूरी तरह से परिवर्तित कर चुका होगा। इसीलिए यह एक उपलब्धि यानी ग्रीन हाइड्रोजन संचालित ट्रेन से कहीं अधिक विकसित भारत का रथ बनेगा जो पूरे विश्व में भारत और भारतीयता का परचम लहराएगा और भारत को एक बार फिर से विश्व गुरु बनाने में सहायक होगा।
नोट – इस लेख में दी गई जानकारी भारत सरकार के अधिकारी दस्तावेज़ से लिया गया है। लिंक पर क्लिक https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?id=150780&NoteId=150780&ModuleId=16®=48&lang=2 करके पढ़ा जा सकता है।
